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| Last Updated::05/02/2019

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अति अवकृष्ट वनों का पारीस्थितिकिय पुनर्स्थापन

वन प्रकृति का एक अभिन्न एवं अति महत्वपूर्ण अंग है, पारिस्थितिकिय संतुलन को कायम रखने, जलवायु व वातावरण को नियंत्रित रखने मे वनो की अहम भूमिका है। जनसंख्या मे भारी वृद्धि, शहरीकरण, वनो की अवैध कटाई आदि ने वन के विस्तार को काफी कम कर दिया है, फलस्वरूप प्रकृतिक संतुलन संकट मे पड़ गया है। इस परिस्थिति मे प्रकृतिक संतुलन को कायम करने के लिए अवकृष्ट वनो का पारिस्थितिक पुनर्वास आवयशक है। इस तथ्य को ध्यान मे रखते हुए निचितपुर- हाजाम वन का चयन किया गया है। चयनित वनक्षेत्र दो भागो मे विभक्त है। प्रथम भाग का वनक्षेत्र तीन गाँव निचितपुर, मेहरागाँव व सहेदा से जुड़ा है । दूसरा भाग हजाम गाँव से जुड़ा है। प्रथम भाग का क्षेत्रफल 76.00 हे0 एवं दुसरे भाग का क्षेत्रफल 11.00 हे0 है। चयनित वन का गहन निरीक्षण कर एवं सभी मुख्य बिन्दुओ यथा मृदा-जल संरक्षण, वनस्पति आदि का ध्यान मे रखते हुए पूरी कार्ययोजना तयार की गई है, ताकि इस अवकृष्ट वन का पारिस्थितिक पुनर्वास हो सके।

वनो का इतिहास

गाँव के बुजुर्ग लोगों के साथ चर्चा से पता चलता है की निचितपुर-हाजाम गाँव का जंगल पहले काफी घना था, लेकिन ग्रामीणों द्वारा अपनी जरूरत की पूर्ति हेतु विदोहन करने एवं लकड़ी को बाजार मे बेचने से निरंतर जंगल क्षिन्न होता गया। गाँव के लोग वन सुरक्षा समिति का गठन कर वनों की सुरक्षा एवं संवर्धन का प्रयाश कर रहे है। परंतु इसमे अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई है।