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| Last Updated::22/01/2019

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Comparative Research Study of the Effect of Removing Congestion of Bamboo and the effect of Forest-Enlargement Operations by different size models

बाँस प्रायः संसार के सभी स्थानों पर व्यापक रूप से पाया जाता है, परंतु दक्षिणी एवं पूर्वी एशिया में बाँस का उत्पादन अपेक्षाकृत ज्यादा होता है। बाँस घास परिवार की एक प्रजाति है। विश्व में इसकी लगभग 1250 प्रजातियां हैं, जिसमें 136 भारतवर्ष में पायी जाती है। भारत में प्रायः बाँस को गरीब आदमी का प्रकाष्ठ अथवा मनुष्य का साथी, चीन में लोगों का मित्र तथा वियतनाम में भाई भी कहा जाता है, क्योंकि इसका उपयोग जीवन के आरंभ से अंत तक विभिन्न रूपों में किया जाता है। यद्यपि बाँस गौण वन-उपज है तथापि वह राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। बाँस का वर्ष 2015 में विश्व स्तर पर 20 मिलियन डाॅलर का बाजार अनुमानित था। 

बाँस की प्राकृतिक वितरण मुख्य रूप से वर्षा, ऊँचाई, तापमान और मिट्टी के प्रकार पर निर्भर करती है। बाँस विभिन्न प्रकार की मिट्टी मंे ऊपजाऊ होते है जैसे की खारा मिट्टी, जलोढ़ मिट्टी, लाल मिट्टी आदि। बारहमासी घास के तौर पर तेजी से बढ़ना, नवीकरणीय बायोमास(Renewable Biomass) का उत्तम स्त्रोत बाँस की अनूठी विशेषताएं है। भारतीय उपमहाद्वीप मंे बाँस की प्रजातियों की विविधता इसे विभिन्न क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त बनाती है।

इसकी असाधारण तेजी से वृद्धि दर (60 से0मी0 प्रतिदिन से ज्यादा) और कई फसल की संभावनाएं होती है जो की इसे वन की अन्य प्रजातियों से अलग और अधिक फायदामंद सिद्ध करती है। बाँस के उपयोग की भी विविध रूप है- इसका उपयोग परंपरागत रूप से तो किया ही जाता है पर अब इसे औद्योगिक प्रयोगों मंे कच्चे माल के तौर पर भी उपयोग में लाया जा रहा है। इस प्रकार भारत में व्यावसायिक खेती के लिए बाँस एक आदर्ष फसल सिद्ध हो रहा है। अच्छी तरह से प्रबंधित बांस वृक्षारोपण के कई छोटे उपयोग भी है जिससे की नियमित आय की अच्छी गुंजाइष है जैसे की सूखे पत्तों का चारे के रूप में प्रयोग, कृषि में उपयोग, मृत रेजोमो (Rhizome) का ईंधन में प्रयोग आदि।