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| Last Updated:: 29/03/2019

बाँस तुम कुछ और हो..!

 

Green Skill Development Program on Propagation & Management of Bamboo at

Jharkhand Envis Hub

 

बाँस तुम कुछ और हो..!

 

ऐ बाँस!  तुम कुछ और हो...

वृक्ष ना सही पर वृक्ष से कम नहीं

लाठी बाँस, बड़ा बाँस, पेका बाँस,

कांटा बाँस, मूली बाँस, आज तुम कहलाते हो ।              

 

बॉटनी कहती तुम घास हो.

इकोनामिक कहती पैसों की तुम आश हो.

फिर बेवजह  क्यों तुम घबराते हो..

भारतीय वन अधिनियम 1927 ने ही

तुम्हें घास नहीं वृक्ष बताया है ।

 

हर रूप तुम्हारा सबको भाता है।

सूप बनकर कृष्ण को यमुना पार कराया है

राम -लखन धनुष के कमान तुम ही थे

मुरलीधर मुरली की तान तुम ही थे..!

 

स्वतंत्रता सेनानियों ने झंडे तुम पर ही फहराये थे।

तुम्हें शान से हाथों में ले तिरंगा खूब लहराए थे

मथुरा की लठमार होली  तुमसे ही तो थी।

कृष्ण के नाम वेणुगोपाल  में तुम ही थे !

 

पर्यावरणविद्  के  हरा सोना, गरीब की इमारती लकड़ी,

चीन का दोस्त, वियतनाम का भाई तुम ही थे।

ऐ बाँस!  कार्बोहाइड्रेट और ऊर्जा के स्रोत तुम्हारे बीज हैं

इथेनॉल के स्रोत तुम्हारे अंदर हैं  !

 

गरीब के छप्पर की शान तुम ही हो..

मिंजो आंदोलन के कारण तुम ही हो..

हर विवाह मंडप के आधार तुम ही हो..

अर्थी में लगकर अंत समय मे,पारतुम ही लगाते हो !

 

आज बने हो हर ग्रामीण कि आजीविका तुम

सरस खादी व वन मेले की जान भी तुम

जिसकी लाठी उसकी भैंस कहावत में भी तुम।

भैया बाँस, बदल डालो देश की तस्वीरें तुम।

 

! मेरी झारखंडवासी

कहता साथी पंकज एक बात ईमान से,

करोगे खेती बांस की सही जांच पड़ताल से

होगे उन्नत और समृद्ध पैसे और खुशहाल से।

 

🏻.....पंकज कुमार सिंह

छात्र : जी.एस.डी.पी. (प्रथम बैच)